Stand-Up India योजना : एससी/एसटी और महिलाओं को सशक्त बनाने की सरकारी पहल
Stand-Up India
Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें
भारत सरकार की महत्वपूर्ण स्टैंड-अप इंडिया योजना ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देकर लाखों लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। 5 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई यह योजना अब भी उद्यमियों के लिए एक मजबूत सहारा बनी हुई है। योजना का मुख्य फोकस नए ग्रीनफील्ड उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जिससे समाज के पिछड़े वर्गों में आर्थिक समावेशन को मजबूती मिली है।
Stand-Up India योजना के तहत प्रत्येक बैंक शाखा कम से कम एक एससी/एसटी उधारकर्ता और एक महिला उधारकर्ता को ऋण उपलब्ध कराती है। लोन की राशि 10 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक है, जिसमें सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी दोनों शामिल हो सकती हैं। यह ऋण विनिर्माण, सेवा, व्यापार या कृषि से जुड़ी गतिविधियों में नए व्यवसाय शुरू करने के लिए दिया जाता है। योजना के तहत परियोजना लागत का 75% तक बैंक द्वारा वित्तपोषित किया जा सकता है, जबकि शेष राशि मार्जिन मनी या अन्य स्रोतों से पूरी की जाती है।
Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें
वर्तमान में योजना की स्थिति मजबूत बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2022 से मार्च 2025 तक स्टैंड-अप इंडिया के माध्यम से एससी, एसटी और महिला उद्यमियों को लगभग 29,000 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए। यह आंकड़ा योजना की लोकप्रियता और प्रभावशीलता को दर्शाता है। कई रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख है कि 2025-26 के बजट में योजना को और मजबूत करने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार, स्टैंड-अप इंडिया को रिवाइज्ड रूप में फिर से लॉन्च करने की संभावना है, जिसमें ऋण सीमा को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है। हालांकि, आधिकारिक वेबसाइट standupmitra.in पर वर्तमान नियमों के अनुसार 1 करोड़ तक का लोन उपलब्ध है।

Stand-Up India योजना की प्रमुख विशेषताएं इसे अन्य योजनाओं से अलग बनाती हैं। आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। एससी/एसटी या महिला होने की पात्रता अनिवार्य है। यदि उद्यम गैर-व्यक्तिगत (कंपनी या पार्टनरशिप) है, तो कम से कम 51% हिस्सेदारी और नियंत्रण एससी/एसटी या महिला उद्यमी के पास होना चाहिए। योजना केवल नए उद्यम (ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट) के लिए है, पहले से चल रहे व्यवसाय के विस्तार के लिए नहीं। ब्याज दर बैंक के नियमों के अनुसार तय होती है, जो आमतौर पर MCLR या EBLR पर आधारित होती है। अधिकतम 7 वर्ष की अवधि में चुकौती संभव है, जिसमें 18 महीने तक की मोरेटोरियम अवधि भी शामिल हो सकती है।
Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें
आवेदन प्रक्रिया काफी सरल है। इच्छुक उद्यमी आधिकारिक पोर्टल www.standupmitra.in पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। यहां प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने, ट्रेनिंग, मेंटरिंग और बैंक से संपर्क की सुविधा उपलब्ध है। SIDBI (स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया) इस योजना की नोडल एजेंसी है। इसके अलावा, नजदीकी बैंक शाखा या लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (LDM) के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है। आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र (एससी/एसटी के लिए), प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट और पहचान प्रमाण शामिल हैं।

स्टैंड-अप इंडिया ने न केवल वित्तीय सहायता प्रदान की है, बल्कि क्रेडिट गारंटी, हैंड-होल्डिंग सपोर्ट और स्किल डेवलपमेंट के माध्यम से उद्यमियों को मजबूत बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो महिलाओं और वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त कर रही है। यदि आप भी अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना देख रहे हैं, तो स्टैंड-अप इंडिया योजना आपके लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकती है।
FAQ सेक्शन (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. स्टैंड-अप इंडिया योजना क्या है?
स्टैंड-अप इंडिया योजना भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे 5 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देना है। योजना के तहत प्रत्येक बैंक शाखा कम से कम एक SC/ST और एक महिला उधारकर्ता को नए ग्रीनफील्ड उद्यम के लिए बैंक लोन उपलब्ध कराती है।
2. स्टैंड-अप इंडिया योजना में कितना लोन मिल सकता है?
योजना के अंतर्गत ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक का कम्पोजिट लोन (टर्म लोन + वर्किंग कैपिटल) उपलब्ध है। यह राशि प्रोजेक्ट कॉस्ट के 75-85% तक कवर कर सकती है, बशर्ते उधारकर्ता की मार्जिन मनी 10-15% हो।
3. स्टैंड-अप इंडिया योजना के लिए पात्रता क्या है?
- आयु कम से कम 18 वर्ष।
- लाभार्थी SC/ST श्रेणी के व्यक्ति या महिला (सभी वर्गों की)।
- उद्यम नया (ग्रीनफील्ड) होना चाहिए – पहले से चल रहे व्यवसाय के विस्तार के लिए नहीं।
- गैर-व्यक्तिगत उद्यम में कम से कम 51% हिस्सेदारी और नियंत्रण SC/ST या महिला उद्यमी के पास।
- किसी बैंक/वित्तीय संस्थान में डिफॉल्ट नहीं होना चाहिए।
4. स्टैंड-अप इंडिया योजना में आवेदन कैसे करें? आवेदन मुख्य रूप से ऑनलाइन पोर्टल www.standupmitra.in पर किया जा सकता है। यहां रजिस्ट्रेशन करें, प्रोजेक्ट डिटेल्स भरें और बैंक से संपर्क करें। वैकल्पिक रूप से नजदीकी बैंक शाखा, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (LDM) या SIDBI के माध्यम से आवेदन संभव है। आवश्यक दस्तावेज: आधार, जाति प्रमाण पत्र (SC/ST के लिए), प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट आदि।
5. 2026 में स्टैंड-अप इंडिया योजना की स्थिति क्या है?
वर्तमान में योजना ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक के लोन प्रदान कर रही है। 2025 में योजना को 31 मार्च तक एक्सटेंड किया गया था। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बजट 2026 में स्टैंड-अप इंडिया II या रिवाइज्ड संस्करण लॉन्च होने की संभावना है, जिसमें लोन लिमिट को ₹2 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है। नवीनतम अपडेट के लिए आधिकारिक पोर्टल standupmitra.in या myScheme.gov.in चेक करें।
6. स्टैंड-अप इंडिया योजना के लाभ क्या हैं?
- कम ब्याज दर (आमतौर पर MCLR/EBLR + 3-3.5%)।
- अधिकतम 7 वर्ष की चुकौती अवधि (18 महीने तक मोरेटोरियम संभव)।
- हैंड-होल्डिंग सपोर्ट, ट्रेनिंग और मेंटरिंग।
- महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार सृजन।
7. स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत कौन से क्षेत्र कवर होते हैं?
विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), सेवा (सर्विस), व्यापार (ट्रेडिंग) और कृषि से जुड़ी गतिविधियां। यह नए उद्यमों के लिए है।