लोकतांत्रिक विरोध को आतंकवाद बताना लोकतंत्र की हत्या- Dr Abhishek Manu Singhvi
Dr Abhishek Manu Singhvi
युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज धाराओं को बताया कानून का क्रूर दुरुपयोग, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
नई दिल्ली, 26 फरवरी
कांग्रेस ने एआई समिट के दौरान प्रदर्शन करने वाले युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज आपराधिक धाराओं को कानून का क्रूर दुरुपयोग करार देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को आतंकवाद या साजिश की श्रेणी में रखना लोकतंत्र की हत्या के समान है।
कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पार्टी के कानून, मानवाधिकार एवं आरटीआई विभाग के चेयरमैन डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर लगाई गई धाराएं तथ्यों से मेल नहीं खातीं और मामले में किसी प्रकार की हिंसा या आपराधिक मंशा के प्रमाण नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत मंडपम एक सार्वजनिक स्थल है, न कि निजी आवास। इसकी तुलना किसी के घर या बेडरूम से करना अनुचित है। उन्होंने कहा कि सरकार से जवाब मांगना आतंकवाद नहीं है और विरोध के तौर-तरीकों को फौजदारी अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सिंघवी ने दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई गई धाराओं की सूची साझा करते हुए एक-एक कर उन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धारा 121 के तहत स्वेच्छा से चोट या गंभीर चोट पहुंचाने का आरोप है। लेकिन ऐसा कब और कहां हुआ? धारा 132 के तहत लोकसेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए हमला करने का आरोप लगाया गया है। किस लोकसेवक के साथ ऐसा हुआ? धारा 221 के तहत लोकसेवक के कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, लेकिन बाधा कहां डाली गई? मुकदमे में लगाई गई धारा 153ए व 197 को लेकर सिंघवी ने तंज कसते हुए कहा कि क्या किसानों और रोजगार के मुद्दे उठाना राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा है? क्या युवाओं के प्रदर्शन से समूहों के बीच दुश्मनी पैदा हुई? उन्होंने मामले में कॉमन इंटेंशन और क्रिमिनल कांस्पिरेसी को भी जोड़ने पर सवाल उठाए।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए डॉ.सिंघवी ने कहा कि आज के भारत में शांतिपूर्ण विरोध करना ही सबसे बड़ा अपराध बन गया है। उन्होंने कहा कि सरकार उत्तर कोरिया जैसी तानाशाही चला रही है और असहमति को देशद्रोह व सवालों को साजिश बताया जा रहा है।

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मोदी सरकार के पिछले 11 वर्षों के शासन में विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के उदाहरण गिनाते हुए उन्होंने कहा कि अपने भविष्य की मांग करने वाले युवाओं पर लाठियां चलाई गईं। भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आवाज उठाने वाली बेटियों को सड़कों से घसीटकर हटाया गया। अन्नदाताओं को देशविरोधी कहकर उन पर आंसू गैस और रबर की गोलियां दागी गईं। उन्होंने कहा कि जब सत्ता ख़ुद को राष्ट्र समझने लगे और असहमति को दुश्मन, तब लोकतंत्र मर जाता है। उन्होंने एक साथ 150 सांसदों के निलंबन को लोकतंत्र के इतिहास में काला अध्याय बताया और नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोके जाने पर भी सरकार को घेरा।
डॉ. सिंघवी ने भरोसा जताया कि न्यायपालिका इस पूरे मामले का समग्र दृष्टिकोण से संज्ञान लेगी। उन्होंने कहा कि ‘आतंकवाद’ और ‘राष्ट्रविरोधी’ जैसे शब्दों का प्रयोग पूरी तरह गलत है। मोदी सरकार जितना अधिक इन युवाओं की आवाज को दबाएगी और इसे सनसनीखेज बनाएगी, इन युवाओं का मुद्दा उतना ही प्रखर होकर उभरेगा।