Atmanirbhar Bharat Rozgar Yojana (ABRY) : भारत में रोजगार वृद्धि और आर्थिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम
Atmanirbhar Bharat Rozgar Yojana
कोरोना महामारी (COVID-19) के वैश्विक संकट के दौरान पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। भारत में भी इस महामारी के कारण लाखों लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था। इस कठिन समय में भारतीय वर्कफोर्स को सहारा देने और फॉर्मल सेक्टर (औपचारिक क्षेत्र) में नई नौकरियों के सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने Atmanirbhar Bharat Rozgar Yojana (एबीआरवाई) की शुरुआत की।
यह योजना आत्मनिर्भर भारत पैकेज 3.0 के एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देश के सामने आई थी। इसका मुख्य क्रियान्वयन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) Employees’ Provident Fund Organisation के माध्यम से किया गया था। इस लेख में हम इस ऐतिहासिक रोजगार प्रोत्साहन योजना के हर पहलू, इसके लाभ, पात्रता और अब तक की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
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आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना (ABRY) क्या है?
आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना केंद्र सरकार की एक डायरेक्ट इंसेंटिव (सीधा प्रोत्साहन) योजना है। इसे आधिकारिक तौर पर 1 अक्टूबर 2020 से प्रभावी किया गया था। इस योजना को लाने का मुख्य विजन यह था कि नियोक्ताओं (Employers) पर वित्तीय बोझ को कम किया जा सके, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा नए कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए आकर्षित हों।
इसके तहत, सरकार ने नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के भविष्य निधि (EPF) योगदान का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन करने का फैसला किया। इसके जरिए उन लोगों को सबसे ज्यादा मदद मिली जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपना रोजगार खो दिया था।
योजना के मुख्य उद्देश्य (Key Objectives)
इस क्रांतिकारी योजना को शुरू करने के पीछे सरकार के कुछ बहुत ही स्पष्ट और रणनीतिक उद्देश्य थे:
- नए रोजगार के अवसर पैदा करना: कंपनियों और संस्थानों को अपने व्यापार का विस्तार करने और नई भर्तियां करने के लिए प्रेरित करना।
- रोजगार की बहाली (Job Restoration): उन सभी श्रमिकों और कर्मचारियों को दोबारा काम पर वापस लाना, जो 1 मार्च 2020 से 30 सितंबर 2020 के बीच बेरोजगार हो गए थे।
- कम आय वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा: देश के उन करोड़ों कामगारों को पीएफ और अन्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना जिनकी मासिक आय ₹15,000 से कम थी।
- व्यापारिक बोझ कम करना: नियोक्ताओं को सब्सिडी देकर उनके लेबर कॉस्ट (श्रम लागत) को घटाना।
वित्तीय प्रोत्साहन और सब्सिडी का गणित
Atmanirbhar Bharat Rozgar Yojana के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ को दो श्रेणियों में बांटा गया था। यह लाभ कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की कुल संख्या (Employment Strength) पर निर्भर करता था। सरकार ने रजिस्ट्रेशन की तारीख से अगले 24 महीनों (2 साल) के लिए यह आर्थिक मदद सीधे कर्मचारियों के यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) में ट्रांसफर की।
1. 1,000 तक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान (Upto 1000 Employees)
यदि किसी कंपनी या संस्था में कुल कर्मचारियों की संख्या 1,000 या उससे कम है, तो केंद्र सरकार ने उस संस्थान में नियुक्त होने वाले नए कर्मचारियों के वेतन का कुल 24% हिस्सा ईपीएफ (EPF) में खुद जमा किया। इसमें शामिल थे:
- कर्मचारी का 12% हिस्सा
- नियोक्ता (Employer) का 12% हिस्सा
2. 1,000 से अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान (More than 1000 Employees)
ऐसी बड़ी कंपनियां जहां 1,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं, वहां सरकार ने नए नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के लिए सिर्फ 12% कर्मचारी हिस्सेदारी का भुगतान भविष्य निधि खाते में किया। ऐसे मामलों में नियोक्ता को अपना 12% हिस्सा खुद ही देना पड़ा।

पात्रता मानदंड : कौन उठा सकता था इसका लाभ?
इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ बेहद सख्त लेकिन व्यावहारिक नियम तय किए थे, ताकि इसका फायदा सही और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे:
कर्मचारियों के लिए योग्यता:
- वेतन सीमा: कर्मचारी का मासिक वेतन ₹15,000 से कम होना अनिवार्य था।
- नए कर्मचारी: ऐसे व्यक्ति जो 1 अक्टूबर 2020 से पहले ईपीएफओ (EPFO) के साथ पंजीकृत नहीं थे और उनके पास पहले से कोई यूएएन (UAN) नंबर नहीं था।
- नौकरी गंवा चुके पुराने कर्मचारी: ऐसे ईपीएफ सदस्य जिनके पास यूएएन था, लेकिन कोविड काल (1 मार्च 2020 से 30 सितंबर 2020) के दौरान उनकी नौकरी छूट गई थी और वे 30 सितंबर 2020 तक किसी भी पीएफ रजिस्टर्ड कंपनी में काम नहीं कर रहे थे।
कंपनियों/संस्थानों के लिए योग्यता:
- संस्थान का कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के अंतर्गत पंजीकृत होना अनिवार्य था।
- यदि किसी कंपनी में 50 से कम कर्मचारी थे, तो उन्हें कम से कम 2 नए कर्मचारियों को जोड़ना आवश्यक था।
- यदि कंपनी में 50 से अधिक कर्मचारी थे, तो योजना का लाभ पाने के लिए कम से कम 5 नए कर्मचारियों को नियुक्त करना अनिवार्य था।
योजना की बड़ी सफलता और वर्तमान स्थिति
शुरुआती दौर में इस योजना की आलोचना भी हुई और लक्ष्य को काफी बड़ा माना गया था। सरकार ने इसके तहत देश भर में लगभग 71.8 लाख कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने का शुरुआती अनुमान लगाया था। लेकिन आंकड़ों के अनुसार, इस योजना ने अपने तय लक्ष्यों को काफी पीछे छोड़ दिया।
- 75 लाख से अधिक नामांकन: जुलाई 2023 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, Atmanirbhar Bharat Rozgar Yojana ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 7.58 मिलियन (75.8 लाख) से अधिक नए कर्मचारियों का नामांकन हासिल कर लिया।
- हजारों करोड़ रुपये का वितरण: इस योजना के तहत सरकार ने लाखों लाभार्थियों के खातों में करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर की।
- रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: आपको बता दें कि नए लाभार्थियों और नियोक्ताओं के लिए इस योजना में पंजीकरण कराने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2022 रखी गई थी।
निष्कर्ष (Conclusion)
Atmanirbhar Bharat Rozgar Yojana केवल एक सरकारी सब्सिडी प्रोग्राम नहीं था, बल्कि यह भारत के आत्मनिर्भर बनने के सफर में एक मील का पत्थर साबित हुआ। इसने न केवल कोरोना के घावों पर मरहम लगाने का काम किया बल्कि असंगठित और कम आय वाले क्षेत्र के लाखों मजदूरों को संगठित क्षेत्र की मुख्यधारा और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा।
आज भले ही इस योजना में नए रजिस्ट्रेशन बंद हो चुके हैं, लेकिन इसने भारतीय रोजगार बाजार को गति देने में जो भूमिका निभाई है, उसकी सराहना वैश्विक स्तर पर की जाती है। भारत सरकार देश में कौशल विकास और नए रोजगार सृजन के लिए लगातार प्रयासरत है और समय-समय पर इसी तरह की अन्य प्रोत्साहन योजनाएं लाती रहती है।
