Army Chief MM Naravane Book विवाद : Parliament में हंगामा, ‘Four Stars of Destiny’ किस वजह से पब्लिश नहीं हुई
Army Chief MM Naravane Book
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Army Chief MM Naravane Book और उसके आसपास की परिस्थितियाँ इस समय देश की राजनीति का एक प्रमुख विषय बनी हुई हैं। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा Four Stars of Destiny ने संसद के बजट सत्र में भारी राजनीतिक बहस और हंगामा पैदा कर दिया है। यह किताब अभी तक किसी भी रिटेल प्लेटफॉर्म या बुकशॉप में उपलब्ध नहीं हुई है, लेकिन इसके अंशों को लेकर तकरार संसद में तूल पकड़ चुका है।
क्या है ‘Four Stars of Destiny’ और क्यों विवादित?
Army Chief MM Naravane Book का शीर्षक Four Stars of Destiny है, जिसे जनरल नरवणे ने लिखा था। यह किताब उनके सैन्य करियर, नेतृत्व और खासकर 2020 में भारत‑चीन सीमा पर लद्दाख में हुई तनावपूर्ण स्थिति जैसे व्यापक मुद्दों पर आधारित बताई जाती है। किताब में कथित तौर पर अग्निपथ योजना, डोकलाम विवाद, और गलवान झड़प जैसे संवेदनशील विषयों पर उनके विचार भी शामिल हैं।
किताब का प्रकाशन जनवरी 2024 में होने की घोषणा की गई थी, और प्री‑ऑर्डर शुरू भी हुआ था, लेकिन यह रक्षा मंत्रालय की समीक्षा और मंज़ूरी के कारण अब तक प्रकाशित नहीं हो पाई है। समीक्षा प्रक्रिया लंबित होने तथा संवेदनशील सामग्री के कारण इसे अब तक रिलीज़ नहीं किया गया है।
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संसद में विवाद का केंद्र
Army Chief MM Naravane Book इस हफ्ते संसद के बजट सत्र में मुख्य विवाद बन गई। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में पुस्तक के कुछ अंश पढ़ने का प्रयास किया, जिसमें प्रधानमंत्री और चीन सीमा नीति को लेकर कथित टिप्पणियाँ थीं। इस पर सत्ताधारी भाजपा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई कि अप्रकाशित किताब के अंश सदन में पढ़े नहीं जा सकते क्योंकि यह संसद के नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के खिलाफ है।
इसके बाद संसद में हंगामा और वाद‑विवाद तीव्र हो गया। कुछ कांग्रेस सांसदों की सस्पेंशन तक की नौबत आ गई और बजट सत्र की कार्यवाही कई दिनों तक प्रभावित रही।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप‑प्रत्यारोप
कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि Army Chief MM Naravane Book में लिखी गई सामग्री राष्ट्रीय हित में है और जनता को इसके बारे में जानकारी मिलनी चाहिए। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इस मुद्दे पर राहुल गांधी का समर्थन किया और केंद्र सरकार से पुस्तक सामग्री पर स्पष्टता मांगी।
वहीं भाजपा का कहना रहा है कि unpublished पुस्तक को लेकर Parliament में उद्धरण देना ठीक नहीं है और देश की सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील मामलों को सार्वजनिक रूप से चर्चित करना उचित नहीं है। दोनों पक्षों के बीच यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा तथा राजनीतिक संवाद के बीच संतुलन की बड़ी बहस खड़ी कर रहा है।
सैन्य नियम और प्रकाशन की प्रक्रिया
भारत में सेना से जुड़े किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की पुस्तकों का प्रकाशन कुछ नियमों और मंज़ूरी प्रक्रियाओं से गुजरता है। विशेष रूप से यदि उस पुस्तक में राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाओं से जुड़ी जानकारी या सैन्य रणनीति पर चर्चा है, तो Official Secrets Act और अन्य रक्षा नियमों के तहत इसे प्रकाशित होने से पहले समीक्षा कराना आवश्यक होता है।
पूर्व सेना प्रमुख के रूप में नरवणे को भी यह मंजूरी लेनी थी, लेकिन यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। उन्होंने खुद पहले कहा था कि समीक्षा में समय लग सकता है ताकि संवेदनशील जानकारी अनजाने में न उजागर हो और राष्ट्रीय हित को सुरक्षित रखा जा सके।
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किताब का विषय और कथित सामग्री
Four Stars of Destiny में नरवणे के करियर के साथ-साथ 2020 के भारत‑चीन सीमा विवाद का विस्तार से जिक्र बताया जाता है। इसके अंशों में कथित तौर पर ऐसे विवरण हैं जिसमें भारत‑चीन गतिरोध में निर्देशन और निर्णय प्रक्रिया के बारे में इंटर्नल टिप्पणियाँ हैं। यह बताया गया है कि चीन की सेना की गतिविधियाँ और भारतीय नेतृत्व का रुख कैसे विकसित हुआ।
इस तरह के विश्लेषण राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा नीति के मामलों को लेकर संवेदनशील माने जाते हैं, जिसके कारण सरकार समीक्षा प्रक्रिया को प्राथमिकता देती है और प्रकाशन से पहले इसे मंज़ूरी देना आवश्यक मानती है।

निष्कर्ष
Army Chief MM Naravane Book की स्थिति अभी तक अनपब्लिश्ड है, लेकिन संसद और राजनीति में इसका प्रभाव व्यापक रूप से देखा जा रहा है। किताब को लेकर संसद में हंगामा और राजनीतिक बहस ने इसे राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। समीक्षा और मंज़ूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह पुस्तक प्रकाशित होने की स्थिति में हो सकती है।
यह मुद्दा न केवल एक पुस्तक की कहानी है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक संवाद के बीच संतुलन की परिभाषा भी है।