8th Pay Commission: चंडीगढ़ बैठक खत्म, फिटमेंट फैक्टर से DA तक उठीं कई बड़ी मांगें, जानें कर्मचारियों को क्या मिल सकता है

ChatGPT Image Sep 20, 2026, 05_36_53 PM

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी गतिविधियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। आयोग ने सितंबर में चंडीगढ़ में तीन दिन तक कर्मचारियों, पेंशनर्स, यूनियनों और दूसरे प्रतिनिधि संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया। यह बैठक 16 से 18 सितंबर 2026 तक चली। इन बैठकों में वेतन, पेंशन, फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता यानी DA, HRA और अन्य सुविधाओं को लेकर अलग-अलग मांगें आयोग के सामने रखी गईं।

चंडीगढ़ बैठक खत्म होने के बाद अब 8th Pay Commission की अगली अहम बैठक बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है। हालांकि, फिलहाल किसी भी फिटमेंट फैक्टर, नई सैलरी या DA व्यवस्था को आयोग ने अंतिम रूप नहीं दिया है। आयोग फिलहाल विभिन्न पक्षों के सुझाव और आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया में है।

3.5 फिटमेंट फैक्टर की मांग क्यों महत्वपूर्ण है?

8th Pay Commission में फिटमेंट फैक्टर सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले मुद्दों में से एक है। कर्मचारी संगठनों की ओर से अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग सामने आ रही है। कुछ प्रस्तावों में 3.5 के आसपास फिटमेंट फैक्टर की बात भी रखी गई है।

फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल मौजूदा बेसिक पे को संशोधित करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 है और केवल उदाहरण के तौर पर 3.5 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए, तो गणना के आधार पर यह राशि ₹63,000 बनती है। लेकिन यह सिर्फ गणितीय उदाहरण है। इसका मतलब यह नहीं है कि 8वें वेतन आयोग ने ₹63,000 न्यूनतम बेसिक पे या 3.5 फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी दे दी है।

विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी मांगों के समर्थन में अलग-अलग आंकड़े और प्रस्ताव आयोग के सामने रख रहे हैं। इससे साफ है कि फिटमेंट फैक्टर पर अभी चर्चा जारी है।

4 बार DA बढ़ाने की भी मांग

महंगाई भत्ता यानी Dearness Allowance (DA) भी 8th Pay Commission की चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मौजूदा व्यवस्था में केंद्रीय कर्मचारियों के DA में आमतौर पर साल में दो बार संशोधन किया जाता है—जनवरी और जुलाई के प्रभाव से।

चंडीगढ़ में हुई चर्चाओं के दौरान कुछ संगठनों ने साल में चार बार DA संशोधित करने की मांग रखी। इसके अलावा DA की गणना के तरीके में बदलाव और महंगाई के आंकड़ों को अधिक तेजी से शामिल करने से जुड़े सुझाव भी सामने आए हैं।

नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) से जुड़े प्रस्तावों में DA की गणना के लिए मौजूदा 12 महीने के औसत के बजाय 6 महीने के औसत पर विचार करने की मांग का उल्लेख किया गया है। कुछ संगठनों ने एक निश्चित स्तर पर पहुंचने के बाद DA को बेसिक पे में मर्ज करने का प्रस्ताव भी रखा है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी कर्मचारी संगठनों की मांगें और सुझाव हैं। आयोग द्वारा इन पर अंतिम निर्णय या सिफारिश अभी नहीं की गई है।

HRA बढ़ाने की मांग भी उठी

वेतन के अलावा House Rent Allowance यानी HRA को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें रखी हैं। महंगाई और शहरों में रहने की बढ़ती लागत को देखते हुए HRA में संशोधन की मांग की जा रही है।

कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि नए वेतन ढांचे में आवास, परिवहन और रोजमर्रा के खर्चों को ध्यान में रखकर भत्तों की समीक्षा होनी चाहिए। चंडीगढ़ बैठक के दौरान वेतन और पेंशन के साथ-साथ विभिन्न भत्तों को लेकर भी प्रतिनिधियों ने अपने पक्ष आयोग के सामने रखे।

देशभर के Important News पायें, Group Join करें

हर 5 साल में चयन वेतनमान की मांग

8th Pay Commission से जुड़ी चर्चाओं में एक अन्य प्रस्ताव चयन वेतनमान की अवधि को लेकर है। कुछ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि चयन वेतनमान से जुड़ी समीक्षा 10 साल के बजाय 5 साल में होनी चाहिए।

इसके अलावा परिवार की परिभाषा और फैमिली यूनिट से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग भी सामने आई है। कुछ संगठनों ने फैमिली यूनिट की संख्या बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें माता-पिता को भी शामिल करने की बात कही गई है।

पेंशनर्स की मांगों पर भी चर्चा

8th Pay Commission की प्रक्रिया सिर्फ मौजूदा केंद्रीय कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। पेंशनर्स और उनके प्रतिनिधि संगठन भी आयोग के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं।

पेंशन संशोधन, महंगाई राहत यानी DR, भत्तों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े अन्य लाभों को लेकर अलग-अलग संगठनों ने अपने सुझाव दिए हैं। आयोग विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से मिलने के जरिए उनकी मांगों, मौजूदा व्यवस्था और वित्तीय प्रभाव से संबंधित जानकारी जुटा रहा है।

8th Pay Commission ने अभी नहीं किया कोई अंतिम ऐलान

केंद्रीय कर्मचारियों के बीच फिटमेंट फैक्टर और नई सैलरी को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सोशल मीडिया पर 3.5, 3.25 और अन्य फिटमेंट फैक्टर को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। लेकिन अभी इन्हें आधिकारिक तौर पर स्वीकृत वेतन वृद्धि नहीं माना जा सकता।

इसी तरह साल में चार बार DA बढ़ाने की मांग भी एक प्रस्ताव है। वर्तमान में लागू व्यवस्था और भविष्य की संभावित व्यवस्था के बीच अंतर समझना जरूरी है। आयोग पहले विभिन्न पक्षों की राय और आंकड़ों का अध्ययन करेगा, उसके बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।

अगली नजर बेंगलुरु बैठक पर

चंडीगढ़ के बाद 8th Pay Commission की अगली महत्वपूर्ण क्षेत्रीय बैठक 7 और 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में प्रस्तावित है। आयोग अलग-अलग क्षेत्रों में कर्मचारी, पेंशनर, यूनियन और अन्य हितधारकों से बातचीत कर रहा है।

आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था और उसे अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई है। इसका मतलब है कि अभी प्रक्रिया जारी है और अंतिम वेतन संरचना, फिटमेंट फैक्टर, DA, HRA या पेंशन में बदलाव को लेकर आधिकारिक निष्कर्ष आने में समय लग सकता है।

कर्मचारियों के लिए क्या समझना जरूरी है?

8th Pay Commission से जुड़ी मौजूदा स्थिति को तीन बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  • 3.5 फिटमेंट फैक्टर: यह कुछ संगठनों की मांग/प्रस्ताव से जुड़ा आंकड़ा है, अंतिम फैसला नहीं।
  • साल में 4 बार DA: कुछ संगठनों ने ऐसी मांग रखी है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में DA संशोधन साल में दो बार होता है।
  • नई सैलरी और पेंशन: अभी अंतिम वेतन मैट्रिक्स या संशोधित भुगतान तय नहीं हुआ है।

इसलिए केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को किसी भी वायरल सैलरी कैलकुलेशन को अंतिम सरकारी घोषणा मानने से पहले आधिकारिक 8th Pay Commission या सरकार की अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।

देशभर के Important News पायें, Group Join करें