UPI Payments Charges: राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला कहा, ट्रंप के सामने झुकना बंद कीजिए और UPI टैक्स वापस लीजिए

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नई दिल्ली: UPI Payments Charges को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने UPI पर लागू होने जा रही नई Merchant Discount Rate यानी MDR व्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सरकार से UPI पर लगाए जा रहे शुल्क को वापस लेने की मांग की। उन्होंने इस मुद्दे को अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी का किया जिक्र

अपने वीडियो संदेश में राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि एक बार उनसे पूछा गया था कि उनका झुकाव लेफ्ट की तरफ है या राइट की तरफ। राहुल गांधी के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने जवाब दिया था कि उनका झुकाव न लेफ्ट की ओर है और न राइट की ओर, बल्कि वह अपनी रीढ़ सीधी रखती हैं।

इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि उनका तरीका अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने का रास्ता चुना है।

UPI Payments Charges को लेकर राहुल गांधी का बड़ा आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि UPI पर शुल्क लगाने के फैसले के जरिए देश के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले से अमेरिका को भी फायदा पहुंच रहा है।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से UPI शुल्क वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को अपनी स्थिति मजबूती से रखनी चाहिए।

उन्होंने अपने वीडियो संदेश में UPI शुल्क को ‘UPI Tax’ बताया और इसे वापस लेने की अपील की।

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2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर क्या बदला?

UPI Payments Charges को लेकर विवाद उस नई MDR व्यवस्था के बाद शुरू हुआ है, जिसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाएगा।

इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है। यानी बड़े पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर भी MDR 300 रुपये से अधिक नहीं होगा।

हालांकि, यह व्यवस्था सभी UPI पेमेंट पर लागू नहीं होगी। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांसफर पर कोई MDR नहीं लगाया जाएगा। इसी तरह 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट भी इस सामान्य MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।

क्या ग्राहकों को देना होगा UPI चार्ज?

UPI Payments Charges को लेकर लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब UPI से पेमेंट करने पर ग्राहक के खाते से भी पैसे कटेंगे।

सरकार के मुताबिक, नया MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ा शुल्क है और इसे सीधे ग्राहक से वसूलने की व्यवस्था नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आम व्यक्ति के P2P ट्रांजैक्शन पहले की तरह बिना शुल्क जारी रहेंगे।

इसके अलावा 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट भी सामान्य MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखना है।

सरकार ने विदेशी दबाव के आरोपों को नकारा

राहुल गांधी ने UPI Payments Charges को अमेरिका से जोड़ते हुए सरकार पर आरोप लगाए हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस तरह के विदेशी दबाव के आरोपों को खारिज किया है।

सरकार का कहना है कि UPI से संबंधित शुल्क व्यवस्था में बदलाव घरेलू जरूरतों और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता को ध्यान में रखकर किया गया है।

सरकार के अनुसार MDR से मिलने वाली राशि भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच वितरित होगी। इसका उद्देश्य UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और दूसरे तकनीकी खर्चों को सपोर्ट करना है।

राहुल गांधी ने क्यों उठाया सवाल?

राहुल गांधी और कांग्रेस का कहना है कि UPI देश में डिजिटल पेमेंट का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।

कांग्रेस का तर्क है कि मर्चेंट्स पर किसी भी अतिरिक्त लागत का असर कारोबार पर पड़ सकता है और भविष्य में इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव ग्राहकों पर भी देखने को मिल सकता है।

इसी वजह से राहुल गांधी ने सरकार से नई शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और UPI Payments Charges को वापस लेने की मांग की है।

UPI Payments Charges पर अब आगे क्या?

UPI Payments Charges का मुद्दा अब आर्थिक व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन चुका है। एक तरफ सरकार इसे UPI सिस्टम की वित्तीय स्थिरता और भविष्य की जरूरतों से जोड़ रही है, जबकि राहुल गांधी और कांग्रेस इसका विरोध कर रहे हैं।

नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है। इसके बाद यह साफ होगा कि मर्चेंट्स और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर इसका व्यावहारिक असर किस तरह पड़ता है।

फिलहाल, इस पूरे विवाद के बीच एक बात स्पष्ट है कि हर UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत चार्ज नहीं लगाया जा रहा है। प्रस्तावित MDR केवल निर्धारित श्रेणी के 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, जबकि P2P ट्रांसफर और छोटे मर्चेंट पेमेंट पर सामान्य MDR लागू नहीं होगा।

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