UPI Payments Charges: कांग्रेस की मांग- UPI भुगतान पर शुल्क लगाने का फैसला तुरंत वापस ले मोदी सरकार, सुप्रिया श्रीनेत ने पूछा- जनता पर क्यों बढ़ाया जा रहा बोझ?
नई दिल्ली: UPI Payments Charges को लेकर देश में एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किए जाने के फैसले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस फैसले को लेकर सरकार से कई सवाल किए और आरोप लगाया कि UPI जैसी लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट व्यवस्था पर शुल्क लगाने का असर कारोबारियों और आम लोगों पर पड़ सकता है।
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि, इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है। वहीं, Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।
UPI Payments Charges पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने UPI Payments Charges को लेकर सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि UPI देश में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है और लाखों छोटे-बड़े कारोबारी इसका इस्तेमाल करते हैं।
सुप्रिया श्रीनेत ने सवाल उठाया कि जब देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है, तब UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने की जरूरत क्यों पड़ी। कांग्रेस का कहना है कि इस शुल्क का असर सीधे तौर पर मर्चेंट्स की लागत पर पड़ सकता है।
पार्टी ने यह भी सवाल किया है कि अगर व्यापारियों की लागत बढ़ती है तो क्या इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।
2,000 रुपये से ऊपर के UPI पेमेंट पर कितना चार्ज?
नई व्यवस्था के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।
उदाहरण के तौर पर 5,000 रुपये के पात्र UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR 20 रुपये होगा। वहीं, 10,000 रुपये के ट्रांजैक्शन पर यह राशि 40 रुपये होगी।
75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत की गणना 300 रुपये से अधिक होने के बावजूद अधिकतम MDR 300 रुपये ही रहेगा।
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क्या ग्राहक से सीधे लिया जाएगा UPI चार्ज?
UPI Payments Charges को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका भुगतान कौन करेगा। नई MDR व्यवस्था मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होती है और शुल्क मर्चेंट की ओर से दिया जाना है। इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक के बैंक खाते से हर बार 0.4 प्रतिशत अतिरिक्त रकम काटी जाएगी।
इसके अलावा 2,000 रुपये तक के Person-to-Merchant UPI पेमेंट MDR से बाहर रखे गए हैं। व्यक्ति से व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांसफर भी शुल्क मुक्त रहेंगे।
छोटे व्यापारियों को राहत
नई व्यवस्था में छोटे कारोबारियों को लेकर भी अलग प्रावधान किए गए हैं। तय सीमा के भीतर कारोबार करने वाले छोटे मर्चेंट्स को MDR से राहत दी गई है।
इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों और कम कारोबार वाले व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का असर कम करना बताया गया है। यानी हर व्यापारी को हर UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत शुल्क नहीं देना होगा।
कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
सुप्रिया श्रीनेत ने UPI Payments Charges के मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
पार्टी के मुताबिक, ऐसे समय में जब छोटे कारोबारी पहले से कई तरह की लागत का सामना कर रहे हैं, डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क का असर भी देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि नई शुल्क व्यवस्था से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा और इससे छोटे कारोबारियों पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
UPI पर चार्ज को लेकर क्यों बढ़ी बहस?
UPI देश में डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकंड में भुगतान होने की सुविधा के कारण इसका इस्तेमाल दुकानों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, रेस्टोरेंट, सेवाओं और अन्य कारोबारों में बड़े पैमाने पर होता है।
ऐसे में UPI Payments Charges से जुड़ा कोई भी बदलाव सीधे तौर पर डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े कारोबारियों और पेमेंट कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है।
नई व्यवस्था में एक तरफ छोटे मूल्य के भुगतान और P2P ट्रांजैक्शन को शुल्क से बाहर रखा गया है, वहीं दूसरी तरफ 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू किया गया है।
सरकार की ओर से क्या कहा गया है?
सरकार और भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों का कहना है कि नई MDR व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखना है। इसके तहत पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी व्यवस्था और साइबर सुरक्षा जैसी जरूरतों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
वहीं, कांग्रेस इस फैसले को लेकर अलग सवाल उठा रही है और इसका असर कारोबारियों तथा ग्राहकों पर पड़ने की संभावना को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांग रही है।
UPI Payments Charges पर क्या समझना जरूरी है?
UPI Payments Charges को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि हर UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क नहीं लगाया गया है।
2,000 रुपये तक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर MDR नहीं है। Person-to-Person ट्रांसफर भी शुल्क मुक्त हैं। 0.4 प्रतिशत MDR केवल निर्धारित श्रेणी के 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।
इसलिए UPI पर चार्ज की खबर को समझते समय यह देखना जरूरी है कि पेमेंट किस प्रकार का है और वह किस श्रेणी में आता है।
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